प्रज्ञानानंद रमेशबाबूप्रज्ञानानंद रमेशबाबू

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू:-

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू जीवन परिचय :- कौन है ? ये शतरंज की दुनिया का नया भारतीय चेहरा जिसने 2023 FIDE World Chess Championship में बड़े बड़े खिलाडियों को धूल चटा दी ! इस लेख में आपको प्रज्ञानानंद रमेशबाबू के जीवन और करियर से जुडी सारी जानकारी मिलेगी l प्रज्ञानान्द रमेशबाबू का जन्म 10 अगस्त 2005 को चेन्नई में हुआ, वे अपने माता, पिता और बहन के साथ चेन्नई के पाडी में रहते हैं,

उनके पिताजी का नाम के. रमेशबाबू है जो की एक बैंक अधिकारी है, उनकी माताजी का नाम मां नागलक्ष्मी है जो एक गृहिणी है, बड़ी बहन का नाम वैशाली रमेशबाबू है वह भी शतरंज की खिलाड़ी हैं, वैशाली बालिकाओं के अंडर-12 और अंडर-14 में वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप जीत चुकी हैं. वैशाली 12 अगस्त 2018 को लातविया के रिगा में अपना अंतिम नॉर्म पूरा कर वुमन ग्रैंडमास्टर बन गई थी l

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू
प्रज्ञानानंद रमेशबाबू

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू के शतरंज का सफ़र :-

विश्वनाथन आनंद को अपना हीरो मानने वाले प्रज्ञानानंद रमेशबाबू ने वर्ष 2013 में वर्ल्ड युथ चैस चैम्पियनशिप में मात्र सात वर्ष की आयु में अंडर -8 का ख़िताब जीतकर फीडे मास्टर की उपाधि प्राप्त की 2015 में वर्ल्ड युथ चेस चैम्पियनशिप का अंडर -10 का ख़िताब भी जीता 2016 में प्रज्ञानानन्द 10 वर्ष, 10 माह और 19 दिन की उम्र में शतंरज के इतिहास के सबसे कम उम्र के ग्रैंड मास्टर बने नवम्बर 2017 में विश्व जूनियर शतरंज चैम्पियनशिप में उन्होंने पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया l

अगर प्रज्ञानानंद रमेशबाबू ने यह टूर्नामेंट जीत लिया होता तो वे सर्गेई कार्जाकिन का रिकार्ड तोड़ने में सफल हो जाते और सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने वाले शख्स बन जाते l

17 अप्रेल 2018 को उन्होंने ग्रीस में हैराक्लियोन फिशर मेमोरियल जीएम नॉर्म टूर्नामेंट में दूसरा ग्रैंडमास्टर नॉर्म अर्जित किया. 23 जून 2018 को प्रज्ञानान्द रमेशबाबू ने ग्रेडिने ओपन में लुका मोरोनी को हराकर तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म प्राप्त किया और ग्रैंडमास्टर बनने वाले विश्व के दूसरे सबसे कम उम्र के शख्स बन गए l

वर्ष 2018 जून 23 को 12 वर्ष 10 माह और 13 दिन की आयु में शतरंज का ग्रैंडमास्टर बन विश्व के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने I कार्जाकिन 2003 में 12 वर्ष 7 माह की आयु में ग्रैंड मास्टर बने थे I आपको बता दें कि अभी विश्व के सर्वश्रेष्ठ शतरंज खिलाड़ी नॉर्वे के मैगनस कार्लसन हैं, जो 13 वर्ष 4 माह की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे I
प्रज्ञानानंद ने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही, अंतर्राष्ट्रीय शतरंज जगत में अपने नाम का लोहा मनवाना चालू कर दिया था l

2018 में विश्व शतरंज के सातवे नंबर के खिलाडी ग्रैंडमास्टर वेस्ले सौ के साथ चार मैच के रैपिड गेम में रमेश बाबू ने अपने से अनुभवी प्रतिध्वंधि को पहले राउंड में पटकनी दे दी तीन गेम में दोनों का स्कोर टाई हो गया, आखरी गेम में वेस्ले ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए प्रज्ञानानन्द को हरा दिया, अपने पहले मैच में प्रज्ञानानंद रमेशबाबू ने साबित केर दिया की वो भी शतरंज के खेल में लम्बी रेस का खिलाडी हैंI

इसके बाद नीदरलैंड्स में शाकवीक एपेलडूर्न टूर्नामेंट हुआ जिसमें प्रज्ञानानंद रमेशबाबू को हार का समना करना पड़ा, टूर्नामेंट में चौथी वरीयता होने के बाद भी उन्होंने नीचे से दूसरा स्थान प्राप्त किया, हार के बावजूद अगले दिन इटली के ओर्तिसेइ में ग्रेडिने ओपन में खेलने उतरे प्रज्ञानानन्द ने दूसरा स्थान हासिल करते हुए ग्रैंडमास्टर बनकर इतिहास रच दिया I

टॉप 100 जूनियर (20 वर्ष से कम) लिस्ट में भारत में 21 खिलाड़ी हैं,  चार भारतीय जूनियर- गुकेश, प्रज्ञानानंद , एरिगैसी और सरीन, शीर्ष 10 में हैं जबकि अन्य 7 शीर्ष 20 में हैं l

2023 FIDE World Chess Championship :-

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू ने वर्ल्ड नंबर 2 फैबियानो कारुआना और वर्ल्ड नंबर 3 हिकारू नाकामुरा को हराकर विश्व कप फाइनल में जगह बनाई, लेकिन वो वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसेन से हार गए। ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन ने हर महत्वपूर्ण शतरंज खिताब जीत लिया है, पांच बार के विश्व चैंपियन ने 2023 FIDE विश्व कप के रैपिड टाईब्रेक में 2.5-1.5 की मैच जीत के साथ जीएम प्रगनानंद रमेशबाबू को 1.5-0.5 से हराकर अपना पहला विश्व कप खिताब जीता।

तीसरे स्थान के प्लेऑफ़ में, जीएम फैबियानो कारुआना ने जीएम निजात अबासोव को दोनों रैपिड टाईब्रेक में 3-1 से हरा तीसरा स्थान हासिल किया l

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू भारतीय युवा खिलाड़ी के लिए एक दिल तोड़ने वाली हार थी, 2023 FIDE विश्व कप की पहली चाल खेले जाने के 25 दिन बाद, दो खिलाड़ी एक-दूसरे के सामने बैठे। तनाव स्पष्ट रहा होगा, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि के कगार पर था। प्रगनानंद विश्व कप जीतने वाले इतिहास में सबसे कम उम्र के, सबसे कम वरीयता प्राप्त और पहले भारतीय खिलाड़ी बन सकते थे , और कार्लसन अंततः एकमात्र खिताब हासिल कर सकते थे, जो अब तक उनके शानदार करियर में उनसे नहीं मिला था।

भारतीय ग्रैंडमास्टर, जिनकी प्रकाशित रेटिंग इवेंट के दौरान पहली बार 2700 को पार कर गई, ने पहले रैपिड टाईब्रेक गेम में शुरुआती 5.a4 के साथ एक इतालवी गेम का विकल्प चुना। उनकी शुरुआती पसंद और तैयारी को टिप्पणीकारों से प्रशंसा मिली, और यह उनके अधिक अनुभवी प्रतिद्वंद्वी थे जिनके पास शुरुआत से ही हल करने के लिए अप्रिय समस्याएं थीं।

दोनों खिलाड़ियों के नाइट रिट्रीट से चूकने के बाद, जो इंजन की शीर्ष पसंद थी, कार्लसन के राजा ने जी7 की ओर कदम बढ़ाया, क्योंकि व्हाइट की सेना ने किंगसाइड की ओर इशारा किया। जबकि अधिकांश खिलाड़ी कभी भी अपने राजा को अपने प्रतिद्वंद्वी के हमले की ओर ले जाने की हिम्मत नहीं करते थे, पूर्व विश्व चैंपियन ने प्रदर्शित किया कि वह अपने राजा की रक्षात्मक शक्ति को समझते थे और यहां तक ​​कि उनके इस कदम के बाद वह शांत भी दिखे।

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू ने अपने समय का लाभ खो दिया क्योंकि उन्होंने अपने राजा को h1 पर ले जाने में लगभग सात मिनट खर्च किए, और यह अनुमान लगाया गया कि वह ब्लैक के रक्षात्मक 17…Qf6 से चूक गए थे। मनोवैज्ञानिक रूप से, यह स्वीकार करना कठिन है कि किसी की जीत की आशाजनक संभावनाएँ समाप्त हो गई हैं, और एक तेज़ गेम में घटनाओं के ऐसे मोड़ को संसाधित करने के लिए बहुत कम समय होता है।

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू 18 वर्षीय खिलाड़ी ने संतुलित बने रहने का उल्लेखनीय काम किया, और उसके बाद के जटिल एंडगेम में, सिलिकॉन मशीन ने बारी-बारी से प्रत्येक खिलाड़ी को सूक्ष्म लाभ दिए, और कोई भी पूर्वानुमानित परिणाम स्पष्ट नहीं था। लेकिन जल्द ही “ब्लिट्ज़ मोड” पर पहुंच गया, जहां विश्व कप की जीत दांव पर होने पर 10 सेकंड की वृद्धि की संभावना कुछ भी नहीं लगती है।

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू ने अपनी घड़ी में केवल छह सेकंड शेष रहते हुए अपना मोहरा आगे बढ़ाया और कार्लसन ने अवसर का लाभ उठाया। उनके किश्ती और शूरवीरों ने आक्रमण किया, और कैंडिडेट्स के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी को एक टुकड़े से नीचे जाने या मेट होने की संभावना का सामना करना पड़ा। उन्होंने तीसरा विकल्प चुना: उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दिन का खेल जिसने कार्लसन को 2023 विश्व कप जीता, नीचे जीएम राफेल लीताओ द्वारा व्याख्या की गई है।

पूरे आयोजन में अपने प्रभावशाली खेल के बाद, प्रज्ञानानंद रमेशबाबू की विश्व कप यात्रा को इस तरह से समाप्त होते देखना दर्दनाक था, लेकिन भारतीय सुपरस्टार ने पिछले महीने में कई अतिरिक्त प्रशंसक जुटाए और साबित किया कि वह एक ताकत हैं। उनकी रेटिंग धीरे-धीरे उनकी ताकत की ओर बढ़ रही है, और उनके आगे कई आशाजनक वर्ष हैं। उनके प्रदर्शन को भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ स्वयं भारतीय शतरंज के दिग्गज जीएम विश्वनाथन आनंद से प्रशंसा मिली।

प्रज्ञानानंद रमेशबाबू

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FAQ:-

Q1:- 2023 फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप कहां हुई ?
Ans:-
2023 फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप बाकू, अजरबैजान में हुई I

Q2:- 2024 फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप कहाँ होगी ?
Ans:-
2 अप्रैल से 25 अप्रैल 2024 तक टोरंटो, कनाडा में महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के साथ फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप होगी I

Q3:- 2023 फिडे विश्व कप और महिला विश्व कप बाकू, अजरबैजान में कब से कब तक चला ?
Ans:-
2023 फिडे विश्व कप और महिला विश्व कप बाकू, अजरबैजान में 30 जुलाई से 24 अगस्त तक चला I 

Q4:- 2023 फिडे विश्व कप और महिला विश्वकप में प्राइज मनी कितनी है ?
Ans:-
2023 फिडे विश्व कप और महिला विश्व कप में combined $2.5 million प्राइज मनी है I

Q5:- शतरंज का आविष्कार किसने किया ?
Ans:-
शतरंज की शुरुआत 7वी शताब्दी के आसपास चतुरंग नाम से भारत में हुई थी, जो बाद में अरबी लोगो ने यूरोप में फैला दी।शतरंज का आधुनिक रूप यूरोप में 15वी शताब्दी            के आखिर में बना।

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